गर्भवती महिलओं में खून की कमी को दूर कर रहा है ‘आयरन सुक्रोज’, पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई योजना

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गर्भवती महिलओं में खून की कमी को दूर कर रहा है ‘आयरन सुक्रोज’, पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई योजना

365 गर्भवती महिलाओं दिया गया आयरन सूक्रोज इंजेक्शन
• जिले के भोरे प्रखंड में सबसे ज्यादा महिलाओं को दिया गया आयरन सूक्रोज

 

गोपालगंज। जिले में अब गर्भवती महिलाओं को आयरन सूक्रोज दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं में खून की कमी को पूरा करने के लिए नई योजना शुरू किया है। आयरन और कैल्शियम की दवाओं के बाद अब आयरन सुक्रोज इंजेक्शन से गर्भवती महिलाओं में खून की पूर्ति की जा रही है।

न्यूनतम लेवल पर खून की मात्रा वाली महिलाओं में इंजेक्शन से खून की शीघ्र पूर्ति होगी। विशेषज्ञ चिकित्सक की देखरेख में ही महिलाओं को आयरन सूक्रोज इंजेक्शन को एनएस वार्टर में मिलाकर सालाइंस के द्वारा लगाया जाता है।पायलट प्रोजेक्ट के तर्ज पर इस योजना का संचालन किया जा रहा है।

इन महिलाओं को दिया जाता है आयरन सूक्रोज:

भोरे पीएचएसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. खाबर इमाम ने बताया कि एनिमिया का पहचान हिमोग्लोबीन लेबल जांच करने के बाद उसकी पहचान की जाती है। इसे तीन भागों में बांटा गया है। पहला हिमोग्लोबीन लेबल ज्यादा है तो एनिमिया नहीं है। हिमोग्लोबीन 7 ग्राम से 10 ग्राम होता है उसे मॉडरेट कहते हैं।

यदि हिमोग्लोबीन 7 ग्राम से नीचे है तो उसे गंभीर माना जाता है। हिमोग्लोबीन 7 ग्राम से 10 ग्राम के बीच रहता है तो उस महिला को आयरन सूक्रोज का इंजेक्शन दिया जाता है। गर्भधारण के तीन महिने के बाद महिला को आयरन सूक्रोज दिया जाता है।

पहला जिला है गोपालगंज जहां सभी प्रखंडों में दिया जा रहा है आयरन सूक्रोज :

केयर इंडिया के डीटीएल मुकेश सिंह ने बताया कि गोपालगंज पहला ऐसा जिला है जहां सभी प्रखंडों में आयरन सूक्रोज दिया जा रहा है। जहां पर गर्भवती महिलाओं को आयरन सूक्रोज इंजेक्शन दिया जा रहा है। गोपालगंज जिले के सभी प्रखंडों भोरे, कुचायकोट, पंचदेवरी, उच्चकागांव, सदर अस्पताल, बैकुंठपुर, कटेया, मांझा, बरौली, हथुआ, थावे, सिधवलिया, विजयीपुर, फुलवरिया में यह योजना चल रही है। अब तक जिले में कुल 365 महिलाओं को आयरन सूक्रोज इंजेक्शन दिया गया है।

एनिमिया को दूर करने के लिए दिया जा रहा है आयरन सूक्रोज

शरीर में खून की कमी होना गंभीर स्थिति है और यह गर्भावस्था में तो और भी विकट हो सकती है। इसलिए विभाग ने जच्चा-बच्चा को स्वास्थ्य लाभ देने के लिए यह हल निकाला है। शरीर को हेल्दी और फिट रहने के लिए अन्य पोषक तत्वों के साथ-साथ आयरन की भी जरूरत होती है। आयरन ही हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है। ये कोशिकाएं ही शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने का काम करती हैं।

हीमोग्लोबिन फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर रक्त में आक्सीजन पहुंचाता है। इसलिए आयरन की कमी से शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है और हीमोग्लोबिन कम होने से शरीर में आक्सीजन की कमी होने लगती है। इसकी वजह से कमजोरी और थकान महसूस होती है, इसी स्थिति को एनीमिया कहते हैं।

क्या कहती हैं महिलाएं

गोपालगंज जिले के भोरे प्रखंड के नारहवा शुकुल गांव के निवासी प्रीति कुमारी ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि गर्भवास्था के दौरान उनका हिमोग्लोबीन लेबल 7ग्राम से नीचे था। जिसके बाद उन्हे आयरन सूक्रोज दिया गया। जिससे उनका एचबी लेबल समान्य हो गया। वहीं तिवारी खरैया गांव निवासी पम्मी तिवारी को भी आयरन सूक्रोज दिया गया है।

भोरे प्रखंड के हीं रामदयाल प्रसाद की पत्नी सपना देवी को भी इसका लाभ दिया गया है। जिससे वह पूरी तरह से संतुष्ट है। प्रसव के दौरान इन्हे किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई। गर्भावस्था के दौरान इन महिलाओं को आयरन सूक्रोज दिया गया है।जिससे सुरक्षित प्रसव कराने में आसानी हुई।

एएनएम को दिया गया विशेष ट्रेनिंग:

इस योजना को सफल बनाने के लिए जिले के सभी अस्पतालों के एएनएम को जिलास्तर पर ट्रेनिंग दिया गया है। जो गर्भवती महिलाओं की जांच करती हैं। जांच के बाद ट्रेंड एएनएम या डॉक्टर के द्वारा हीं आवश्यकता अनुसार आयरन सूक्रोज इंजेक्शन चढ़ाया जाता है। इसे एनएस वार्टर में मिलाकर सालाइंस के द्वारा चढ़ाया जाता है।

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